तथ्य अनमोल सुसंस्कार से व्यक्तित्व उभरता हैं
या कि सुसंस्कारी वातावरण किस्मत से मिलता
किस्मत का निर्माण सुविचारों सुक्रमों से होता हैं
सुसंस्कारों से सामने सुकर्म सुविचार प्रकट होते हैं
पहले लिखा जो बदलते किस्मत यह किस्मत
हैं
राह वही से मिलती जब राह के दरवाजे खुलते हैं
गेरों के दरवाजे खोलोगे तुम्हारे दरवाजे खुलते हैं
बुद्धिमता प्रखर होती इंसान सुशिक्षित हो या नही
शिक्षा पहुंच परिचय पृष्ठभूमि मानो खोती कही है
भूलता बोया इंसा की वर्तमान घडियाँ रोती यही हैं
स्वमंथन की आदत न, कहे खुदा की निष्ठुरता हैं
-----फैसला आपका व्यक्तित्व कैसे
उभरता हैं-----
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
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