हर
क्षण दुनिया के रंग व नजारे मैं बदलते यहाँ देखता हू
रहता
हूं मैं भीड में यहाँ दुनिया की फिर भी अकेला हूं मैं
न
पति न बेटा न कोई रिश्ता ही इस दुनिया में मेरे यारों
यहाँ
की गैरत देख कर हैरत होती क्यों इतना अकेला हूं मैं
मौजूद
अनेकों सगे सबंधी, प्रशंसक व ब्लाग के चार यार हैं
अनजान
दुनिया के पथिक तुमअनजान दुनिया से आये हो
रंग
न दुनियायी रंगों का चढे वर्ना बदसूरत तुम हो जावोगे
उठती
जमीं पर भंवरी चक्रों का फंस यहाँ में कुछ न पावोगे
देखो
गर रंग न हुये हावी तुम पथिक अनजाना
कहलावोगे
न
फंसो यहाँ तूफानों में जिन्दगी का सूरज डलते देखता हूं
ब्लाग --
सूनी राह का पथिक
सतनाम सिंह साहनी (पथिक अनजाना)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें